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महिलाओं और बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लायंस क्लब प्रेरणा की एक अद्भुत पहल

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ग्वालियर, मध्यप्रदेश। कहते हैं समाज सेवा की शुरुआत हम किसी भी स्तर पर कर सकते हैं चाहे वह घर से हो या फिर समाज के बीच जाकर, हमारा मुख्य उद्देश्य सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाना होना चाहिए। ऐसा कहना है मध्यप्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली लायंस क्लब ग्वालियर प्रेरणा की क्लब मेंटोर और रीजन सेक्रेटरी रंजना गोयल का।

उन्होंने बताया कि हम बच्चों और महिलाओं के हित में कार्य करते हैं और जो भी जरूरतमंद लोग होते हैं, हम उनकी मदद करते हैं। हम अपने स्तर पर संभावनाओं को पहचानकर सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। आने वाले महीने से हम एक ड्राइविंग प्रोग्राम की शुरुआत करने जा रहे हैं, जिसमें हम बच्चों को ड्राइविंग सिखाएंगे और उन्हें आत्मनिर्भरता की कला सिखाएंगे। यह प्रोग्राम हमारे अगले महीने से प्रारंभ होगा।

रंजना ने बताया कि ग्वालियर में उनके लायंस क्लब प्रेरणा के साथ मिलकर मातृछाया अनाथालय में समय समय पर स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य सामग्री प्रदान करते हैं। उनका उद्देश्य है शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए कंपटीशन्स आयोजित करना, जो उन्हें बेहतर बनाने में सहायक होंगे। उनका संगठन एक स्कूल के निशक्त बच्चों के लिए भी सामाजिक सेवाएं प्रदान करता है।

हमने एक छोटी सी फिल्म बनाई है जिसमें हमने उन बच्चों को दिखाया है जो भीख मांगते हैं, विशेषकर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी जगहों पर। इसके माध्यम से हमने उनकी जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया है और एक जागरुकता प्रोग्राम भी किया है जिसने उन बच्चों को सिखाया कि भिख की जगह आत्मनिर्भरता की ओर कैसे बढ़ना है। हमने फूड कूपन भी तैयार किए हैं, जो हम सीधे उन्हें नहीं देते हैं, बल्कि हमने कुछ चयनित स्थानों पर संपर्क किया है जहां ये कूपन उपयुक्त होंगे और हम उन्हें दे सकें।

रंजना गोयल ने बताया कि हमारे यहां सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के क्षेत्र में विभिन्न प्रोजेक्ट्स चलाती है, और इसके लिए फंड भी आते हैं। हालांकि ये सुविधाएं जो वितरित की जा रही हैं, उन लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं जिनको यह सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह चाहे शिक्षा हो या स्वास्थ। सरकार जो फ्री राशन प्रदान कर रही है इसकी जगह बच्चों के अच्छी एजूकेशन पर ध्यान दे उनके लिए जागरुकता प्रोग्राम करे क्योंकि इससे ही राष्ट्र का निर्माण होगा। बच्चें अपने आप में सक्षम होंगे तो उनकी फ्री की चीजों की जरूरत ही नहीं होगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।