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ग्वालियर को स्वच्छता में अव्वल बनाने के लिए लिटिल एंजेल्स की अभिनव पहल, कहा साथ मिलकर हम अपने ग्वालियर को स्वच्छता के शिखर पर ले जा सकते हैं

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ग्वालियर, मध्यप्रदेश। स्वच्छता हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलु है जो एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण को सुनिश्चित करता है। स्वच्छता में ईश्वर का वास होता है और इसीलिए हम अपने घर और घर के बाहर स्वच्छता का बेहद ध्यान रखते हैं पर हमें यह जिम्मेदारी सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं रखनी चाहिए बल्कि हमें अपने आसपास और अपने शहर की स्वच्छता का भी ध्यान रखना चाहिए। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर वन बनाने के लिए लिटिल एंजेल्स हाई स्कूल के प्रबंधन, शिक्षक और विद्यार्थियों ने मिलकर ग्वालियर शहर को स्वच्छता में नंबर वन बनाने का बीड़ा उठाते हुए ग्वालियर के नागरिकों से स्वच्छ ग्वालियर बनाने की अपील की है। लिटिल एंजेल्स हाई स्कूल के इको क्लब के विद्यार्थियों ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि जब अन्य शहर स्वच्छता में अव्वल आ सकते हैं तो ग्वालियर शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर वन बनाने की जिम्मेदारी भी हमारी होना चाहिए। हमें ग्वालियर को स्वच्छता में नंबर वन बनाने के लिए एकजुट होकर ग्वालियर शहर में स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना होगा। जिससे हमारा ग्वालियर शहर स्वच्छता में नंबर वन बन सके।

लिटिल एंजेल्स हाई स्कूल के इको क्लब द्वारा ग्वालियर के नागरिकों से यह अपील की गई।

ग्वालियर के प्रिय साथी नागरिकों,आइये, ग्वालियर को मौलिक स्वर्ग में बदलने के सामूहिक प्रयास में एकजुट हो जाएं। स्वच्छता और हरित प्रथाओं को अपनाने के लिए लिटिल एंजल्स हाई स्कूल ग्वालियर इको क्लब के उत्साही छात्रों के साथ हाथ मिलाएं। साथ मिलकर, हम अपने शहर को स्वच्छता के शिखर पर ले जा सकते हैं, व भारत के स्वच्छतम शहरों में एक योग्य स्थान अर्जित करा सकते हैं। आइए आज स्वच्छ, हरित कल के लिए परिवर्तन के बीज बोएं।

बता दें स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के परिणाम आने के बाद एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में ग्वालियर को इस सर्वेक्षण में देशभर में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है। समग्र रैंकिंग में दो पायदान का सुधार हुआ है, क्योंकि पिछले वर्ष शहर की रैंकिंग 18वीं रही थी। इंदौर और भोपाल के बाद ग्वालियर मध्यप्रदेश का तीसरा सबसे साफ शहर घोषित किया गया है। इस साल इंदौर के साथ-साथ सूरत को भी स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर वन स्थान मिला है। लेटेस्ट स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर ने संयुक्त जीत के साथ सूरत के साथ सम्मान साझा करते हुए सातवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल किया।

वहीं इस मुहिम के बारे में जानकारी देते हुए लिटिल एंजेल्स हाई स्कूल की ईको क्लब प्रभारी डॉ. नाज़नीन खान ने बताया कि हमारा शहर ग्वालियर एक ऐतिहासिक शहर है, इसकी अपनी गौरवशाली गाथा है। और हम ग्वालियर शहर को स्वच्छता के पहले पायदान पर लाने का भरसक प्रयास करेंगे, क्योंकि हमारे शहर में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि हमारे विद्यालय प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य बच्चों के द्वारा समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है, और इस सकारात्मक पहल से हमारे ग्वालियर को स्वच्छता में शिखर तक पहुंचाना है।

डॉ. नाज़नीन ने आगे विद्यालय के स्वच्छता मिशन के बारे में बताते हुए कहा कि हमने नुक्कड़ नाटक तैयार किए हैं, जो आने वाले समय में हम अपने विद्यार्थियों की मदद से शहर की टाउनशिप्स में जाकर स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का प्रयास करेंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।