भोपाल। मध्य प्रदेश की वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट (MPT Ortho) और पेजेंट विनर डॉ. सीमा रानी ने अपने दो दशक लंबे चिकित्सा अनुभव, राष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान और ग्लैमर की दुनिया में हासिल उपलब्धियों के जरिए यह साबित किया है कि जुनून, निरंतर सीखने की इच्छा और परिवार का सहयोग किसी भी व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उनका मानना है कि पेशेवर उत्कृष्टता के साथ आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता महिलाओं को समाज में नई पहचान दिला सकती है।
वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. सीमा रानी ने बताया कि उनका सपना पहले एमबीबीएस डॉक्टर बनने का था, लेकिन पिता के कमर दर्द के इलाज के दौरान पहली बार फिजियोथेरेपी को करीब से देखने के बाद उन्होंने इसी क्षेत्र को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2006 में भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल से अपने पेशेवर सफर की शुरुआत करने वाली डॉ. सीमा ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं। आज आधुनिक तकनीकों, इंटीग्रेटेड अप्रोच, ड्राई नीडलिंग, काइरोप्रैक्टिक, टेपिंग और एडवांस रिहैबिलिटेशन जैसी विधियों ने उपचार को अधिक प्रभावी बनाया है। उनका कहना है कि किसी भी चिकित्सक के लिए नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाग लेना और नई तकनीकों को सीखना बेहद आवश्यक है।
डॉ. सीमा ने अपने करियर में मिले अनेक सम्मानों को याद करते हुए कहा कि बेस्ट क्लिनिशियन अवॉर्ड और रिमार्केबल कॉन्ट्रिब्यूशन टू प्रोफेशन उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सम्मान हैं। उन्होंने इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने दिवंगत पिता को दिया, जिन्होंने हमेशा उन्हें बेटी नहीं बल्कि बेटा मानकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी को डॉक्टर की पहचान दिलाने की लंबी लड़ाई अब सफल हो चुकी है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के नए प्रावधानों ने देशभर के फिजियोथेरेपिस्ट्स को उनका अधिकार दिलाया है। उनके अनुसार चिकित्सा क्षेत्र में अनुभव, रिसर्च और निरंतर सीखने की प्रक्रिया ही मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का आधार है।
चिकित्सा के साथ-साथ डॉ. सीमा ने ग्लैमर की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई। मिसेज ग्लैमरस मध्य प्रदेश का खिताब जीतने के बाद उन्होंने महसूस किया कि उम्र कभी भी सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बनती। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के बाद कई महिलाओं ने उनसे प्रेरणा लेकर अपने सपनों को नई दिशा दी। उन्होंने अपने घर से ही महिलाओं को योग सेंटर शुरू करने, कला आधारित व्यवसाय स्थापित करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. सीमा का मानना है कि वास्तविक महिला सशक्तिकरण तभी संभव है जब महिलाएं अपने आत्मविश्वास को पहचानें, नए अवसरों को स्वीकार करें और अपने सपनों को साकार करने का साहस जुटाएं।





