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डायटीशियन से मिस सेंट्रल इंडिया रनर-अप तक: अनिका चक्रवर्ती ने स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और महिला सशक्तिकरण को बनाया अपनी पहचान

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भोपाल। मध्य प्रदेश की डायटीशियन एवं रनर-अप मिस सेंट्रल इंडिया 2026 तथा मिस ग्लैमरस 2026 अनिका चक्रवर्ती का मानना है कि सफलता केवल मंच पर जीतने से नहीं, बल्कि समाज के लिए सकारात्मक बदलाव लाने से मिलती है। स्वास्थ्य जागरूकता, मॉडलिंग और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय अनिका का कहना है कि शिक्षा, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति को उसकी मंजिल तक पहुंचाने की सबसे बड़ी ताकत हैं।

डायटीशियन और मॉडल अनिका चक्रवर्ती ने बताया कि बचपन से ही उनका उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य के लिए काम करना था। इसी सोच के साथ उन्होंने डायटेटिक्स की पढ़ाई पूरी की और हेल्थ सेक्टर को अपना प्रोफेशन बनाया। दूसरी ओर फैशन और मॉडलिंग के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें मिस सेंट्रल इंडिया 2026 प्रतियोगिता तक पहुंचाया, जहां उन्होंने रनर-अप और मिस ग्लैमरस 2026 का खिताब अपने नाम किया। उन्होंने कहा कि मॉडलिंग ने उनके व्यक्तित्व में नया आत्मविश्वास पैदा किया और आज वे बिना किसी झिझक के हर मंच पर अपनी पहचान बनाने में सक्षम हैं। इस सफलता का श्रेय उन्होंने प्रतियोगिता की मेंटर फराह मैम को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन किया।

अनिका ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल ग्लैमर की दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वे महिला सशक्तिकरण के लिए भी सक्रिय रूप से काम करना चाहती हैं। स्कूल के दिनों में उन्होंने कराटे में जूनियर ब्राउन बेल्ट और भरतनाट्यम में जूनियर डिप्लोमा प्राप्त किया, जिसका पूरा श्रेय उन्होंने अपनी मां को दिया। उनके अनुसार हर लड़की को शिक्षा के साथ-साथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी अवश्य लेना चाहिए ताकि वह आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सके। उनका मानना है कि महिलाओं के सशक्तिकरण की पहली शर्त शिक्षा है और जब तक महिलाओं को सही शिक्षा और मार्गदर्शन नहीं मिलेगा, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं होगा।

डायटीशियन के रूप में अनिका ने लोगों को संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि अच्छी सेहत के लिए महंगे सप्लीमेंट्स नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक भोजन सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के भोजन को सही मात्रा में लेकर और खानपान में संयम बरतकर अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां को देते हुए कहा कि एकल अभिभावक होने के बावजूद उनकी मां ने हर कदम पर उनका साथ दिया, उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की स्वतंत्रता दी और हमेशा यह विश्वास दिलाया कि वह हर लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। अनिका का कहना है कि इसी विश्वास और प्रेरणा ने उन्हें स्वास्थ्य, मॉडलिंग और समाज सेवा—तीनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने का साहस दिया।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।