db News Network

Home » मुस्लिमों पर अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस का हमला

मुस्लिमों पर अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस का हमला

0 comments 64 views 2 minutes read

नई दिल्ली। कांग्रेस ने शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह पर घुसपैठ संबंधी उनकी एक टिप्पणी को लेकर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण के लिए व्यापक दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं। शाह ने शुक्रवार को दावा किया था कि कुछ राजनीतिक दल घुसपैठियों को वोट बैंक की तरह देखते हैं। उन्होंने यह सवाल भी किया था कि गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर घुसपैठ क्यों नहीं होती?

शाह ने यह टिप्पणी ‘दैनिक जागरण’ के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में आयोजित एक व्याख्यान में की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शाह पर निशाना साधते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘वह स्वदेशी रूप से विकसित जनसंहारक हथियार – ‘वेपन ऑफ मास डिसइनफॉरमेशन’ (व्यापक दुष्प्रचार वाले हथियार) और साथ ही एक ‘वेपन ऑफ इंटीमीडिट्री मास पोलराइजेशन’ (धमकी वाले व्यापक ध्रुवीकरण के हथियार) का इस्तेमाल कर रहे हैं।’

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी शाह पर हमला बोला। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सहकारिता मंत्री ने 10 अक्टूबर को हिंदू-मुस्लिम विवाद को हवा देने और आगामी चुनावों से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए बेहद आपत्तिजनक बात कही। उन्होंने ‘एक्स’ पर मुसलमानों की बढ़ती आबादी का हवाला देकर यह संकेत दिया कि भारत में व्यापक ‘मुस्लिम घुसपैठ’ हो रही है।’

खेड़ा ने कहा, ‘इस स्थिति में एक तार्किक सवाल यह है कि अगर मुस्लिम आबादी, जैसा कि वह दावा करते हैं, ‘घुसपैठ के कारण’ बढ़ी है, तो गृह मंत्री पिछले 11 साल से क्या कर रहे थे?’ उन्होंने कहा, ‘उन्हें जल्दी ही एहसास हो गया कि वह गृह मंत्री भी हैं और मुसलमानों पर निशाना साधने वाला उनकी चाल उल्टी पड़ गई। इसलिए, उनका पोस्ट तुरंत हटा दिया गया।

खेड़ा ने कहा, ‘लेकिन इससे सच्चाई नहीं मिटती कि 2005-2013 के बीच, कांग्रेस सरकारों ने 88,792 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित किया। भाजपा शासन में 11 वर्षों में 10,000 से भी कम लोगों को निर्वासित किया गया है। फिर भी, हमने कभी शेखी नहीं बघारी और भाजपा कभी चुप नहीं रहेगी।’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खाली बर्तन ज्यादा खड़कते हैं।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।