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सर्दियों में खूब पिएं ये 7 सुपर हेल्दी जूस, शरीर को करेंगे यह फायदा

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नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही शरीर की ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) का ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। ठंडी हवाओं के कारण कई बार शरीर सुस्त महसूस करता है और जुकाम, खांसी या फ्लू जैसी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं।

ऐसे में, कुछ नेचुरल जूस का सेवन आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। ये जूस न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि शरीर को अंदर से गर्माहट भी देते हैं।

1. गाजर का जूस
सर्दियों का सबसे लोकप्रिय जूस, गाजर का जूस विटामिन A, C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ त्वचा को ग्लोइंग बनाता है। रोजाना सुबह खाली पेट गाजर का जूस पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और सर्दी-जुकाम से बचाव होता है।

2. आंवला जूस
आंवला यानी इंडियन गूजबेरी, विटामिन C का सबसे अच्छा स्रोत है। इसका जूस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। सर्दियों में रोजाना एक गिलास आंवला जूस पीना बालों और त्वचा के लिए भी फायदेमंद है।

3. नींबू-अदरक का जूस
ठंड के मौसम में नींबू और अदरक का जूस शरीर को अंदर से गर्म रखता है। इसमें मौजूद एंटीवायरल गुण गले की खराश और खांसी से राहत देते हैं। यह डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में भी काम करता है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है।

4. सेब-बिट रूट जूस
सेब और चुकंदर का जूस आयरन, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यह सर्दियों में एनर्जी बनाए रखता है और हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाता है। महिलाओं और बच्चों के लिए यह जूस खासतौर पर लाभदायक है।

5. अनानास और तुलसी का जूस
अगर आप कुछ हटकर पीना चाहते हैं, तो अनानास और तुलसी का जूस एक बेहतरीन विकल्प है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सूजन और संक्रमण से भी बचाव करता है।

6. टमाटर का जूस
टमाटर का जूस विटामिन C, पोटैशियम और लाइकोपीन से भरपूर होता है। यह जूस इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के साथ कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करता है।

7. एलोवेरा जूस
एलोवेरा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को डिटॉक्स करते हैं और सर्दियों में स्किन को ड्राई होने से बचाते हैं। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पाचन भी बेहतर होता है।
सर्दियों में इन नेचुरल जूस का सेवन करने से शरीर गर्म और एनर्जेटिक बना रहता है। अगर आप चाहें तो इनमें थोड़ा सा शहद या काला नमक मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों बढ़ा सकते हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।