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इंदौर के युवा उद्यमी आदित्य गिलके ने ग्रीन बिजनेस से रचा नया अध्याय — “शुरुआत ₹3000 से की, आज देशभर में फैला नेटवर्क”

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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के युवा उद्यमी आदित्य गिलके, संस्थापक A.G. Edutech और DreamAangan, ने यह साबित कर दिखाया है कि दृढ़ संकल्प और नवाचार से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। मात्र 17 वर्ष की आयु में ₹3000 के निवेश से एक पौधों की नर्सरी से अपने सफर की शुरुआत करने वाले आदित्य ने आज अपने व्यवसाय को देशभर में फैलाया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत बेहद छोटे स्तर पर हुई थी, लेकिन उद्देश्य बड़ा था — “मैंने पॉकेट मनी लेना बंद कर दिया था और सोचा कि खुद के पैरों पर खड़ा होना है।” बिना किसी बाहरी मदद के आदित्य ने ऑर्गैनिक गार्डनिंग, प्लांट बेस्ड प्रोडक्ट्स और ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्सेज के जरिए अपने उद्यम को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया


आदित्य ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया मार्केटिंग को अपने व्यवसाय का मुख्य आधार बनाया, क्योंकि शुरुआत में विज्ञापन या प्रमोशन के लिए पूंजी नहीं थी। उन्होंने खुद अपने सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों तक पहुँचना शुरू किया और आज करीब 2.8 लाख लोगों का ऑनलाइन समुदाय उनसे जुड़ा हुआ है। उनके ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ऑल इंडिया डिलीवरी होती है, जहाँ से लोग ऑर्गैनिक फर्टिलाइज़र, गार्डनिंग प्रोडक्ट्स, और प्लांट केयर कोर्सेज खरीदते हैं। अब तक करीब 4000 से अधिक छात्रों ने उनके ऑनलाइन और ऑफलाइन कोर्स किए हैं। “शुरुआत छोटे कदमों से हुई थी, लेकिन अब हमारा लक्ष्य है कि भारत के हर राज्य में हमारी ग्रीन कम्युनिटी सक्रिय हो,” उन्होंने बताया।


आदित्य का मानना है कि आने वाले वर्षों में खेती और हॉर्टिकल्चर का महत्व और बढ़ेगा। उन्होंने कहा, “आज भले ही युवा खेती से दूर जा रहे हैं, लेकिन एक समय ऐसा आएगा जब जमीन और हरियाली से जुड़ना उनकी मजबूरी नहीं, ज़रूरत बन जाएगा।” अब आदित्य अपने ग्रीन स्टार्टअप के साथ-साथ एक सोशल मीडिया एजेंसी भी चला रहे हैं, जो विभिन्न ब्रांड्स और क्रिएटर्स को डिजिटल रूप से आगे बढ़ाने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि उनकी एजेंसी ने कुछ महीनों में ही अपने क्लाइंट्स के प्रोफाइल्स को ऑर्गैनिक रूप से हजारों फॉलोअर्स तक बढ़ाया है। उनका लक्ष्य है — “भारत में ग्रीन एंटरप्रेन्योरशिप और डिजिटल क्रिएटिविटी को एक साथ जोड़कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना।”

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।