मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पीजीटी मैथमेटिक्स ऋषभ शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान शुरू की। साथियों को बेसिक गणित में संघर्ष करते देख उन्होंने पढ़ाने की शुरुआत की और धीरे-धीरे महसूस किया कि समस्या प्रतियोगिता की नहीं, बल्कि स्कूल स्तर के कमजोर आधार की है। तभी से उन्होंने बुनियादी गणित को मजबूत करने को अपना लक्ष्य बना लिया।
ऋषभ शर्मा बताते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय उन्होंने देखा कि कई छात्र साधारण अवधारणाओं में ही उलझ जाते हैं। उनकी स्वयं की कैलकुलेशन स्पीड और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी बेहतर थी, इसलिए उन्होंने पढ़ाना शुरू किया। पढ़ाते-पढ़ाते उन्हें समझ आया कि स्कूल में सीखे गए बेसिक्स ही कमजोर हैं, जिससे प्रतियोगिता में गैप बन जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए उन्होंने स्कूल स्तर पर काम करने का निर्णय लिया, ताकि छात्र आगे चलकर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकें।
गणित से जुड़े डर पर वे कहते हैं कि “मैथ्स कठिन नहीं, बल्कि उसे समझाने और अभ्यास कराने का तरीका महत्वपूर्ण है।” वे वैदिक मैथ्स और स्पीड कैलकुलेशन जैसी तकनीकों के माध्यम से छात्रों का भय कम करते हैं। छोटे-छोटे ट्रिक्स और नियमित अभ्यास से छात्रों में रुचि बढ़ती है और आत्मविश्वास आता है। उनका मानना है कि जब छात्र देखता है कि बड़ी गणनाएँ भी सेकंड्स में हल हो सकती हैं, तो उसका डर स्वतः कम होने लगता है।
शिक्षा व्यवस्था और तकनीक पर बोलते हुए ऋषभ शर्मा मानते हैं कि आज संसाधन तो बहुत हैं, लेकिन एकाग्रता की कमी बड़ी चुनौती है। सोशल मीडिया और गैजेट्स छात्रों को भटकाते हैं। वे छात्रों और अभिभावकों दोनों को सलाह देते हैं कि टेक्नोलॉजी का उपयोग सकारात्मक दिशा में हो, साथ ही कम्युनिकेशन, अनुशासन और मूलभूत ज्ञान पर भी ध्यान दिया जाए। भविष्य को लेकर वे शिक्षा क्षेत्र में ही अपना योगदान जारी रखना चाहते हैं, ताकि छात्र मजबूत आधार के साथ अपने करियर की दिशा तय कर सकें।





