मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के माखननगर निवासी युवा कलाकार शिवम नामदेव ने मधुबनी चित्रकला को आधुनिक विषयों से जोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है। बचपन से चित्रकला में रुचि रखने वाले शिवम के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय उनकी कला-यात्रा का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहां उन्हें कला को समझने और निखारने का अवसर मिला। बाद में मधुबनी की प्रसिद्ध लोक कलाकार सुनीता झा के मार्गदर्शन में उन्होंने इस पारंपरिक कला शैली को गंभीरता से सीखना शुरू किया।
शिवम मुख्य रूप से मधुबनी कला पर काम करते हैं, लेकिन अन्य भारतीय कला शैलियों और माध्यमों में भी प्रयोग करते हैं। उनकी कला की खासियत यह है कि वे पारंपरिक मधुबनी शैली में आधुनिक जीवन, पर्यावरण और सामाजिक समस्याओं जैसे समकालीन विषयों को चित्रित करते हैं। उनकी पर्यावरण आधारित पेंटिंग में प्रकृति, वर्तमान परिस्थितियों और संभावित भविष्य को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। उनके कार्य देश के विभिन्न कला आयोजनों और प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुके हैं, जबकि उन्हें कई कला प्रतियोगिताओं और प्रदर्शनियों में सम्मान भी प्राप्त हुआ है।
शिवम का उद्देश्य अपनी कला को व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित रखना नहीं, बल्कि लोककलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि कला प्रदर्शनियां, वर्कशॉप और आधुनिक माध्यम लोककलाओं को युवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भविष्य में वे मधुबनी कला में नए प्रयोग जारी रखते हुए सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों को प्रभावी ढंग से सामने लाना चाहते हैं और चाहते हैं कि देश के साथ-साथ विदेशों में भी लोग भारतीय लोककला को समझें, सीखें और इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हों।





