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कला केवल हुनर नहीं, तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का सशक्त माध्यम: विनीता पाटीदार

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भोपाल। कला को केवल चित्रकारी अथवा एक रचनात्मक कौशल तक सीमित न मानते हुए इसे मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, आत्म-अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास के विकास का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में भोपाल की यूनिक वर्सेटाइल आर्ट स्टूडियो (UVA) की संस्थापक विनीता पाटीदार निरंतर कार्य कर रही हैं। वर्ष 2024 में स्थापित इस स्टूडियो में कला प्रशिक्षण के साथ-साथ आर्ट थेरेपी और रिलैक्सेशन आधारित रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को कला से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

विनीता पाटीदार के अनुसार, “रचनात्मक गतिविधियां व्यक्ति को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने, तनाव से राहत पाने और स्वयं से जुड़ने का अवसर देती हैं। कला के माध्यम से व्यक्ति न केवल कुछ नया सृजित करता है, बल्कि उसे भीतर से संतुष्टि और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है।
स्टूडियो की स्थापना से पहले विनीता पाटीदार अपनी छोटी टीम के साथ विभिन्न कमर्शियल और कस्टमाइज्ड आर्ट प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही थीं। स्टूडियो शुरू होने के बाद डॉक्टरों, व्यवसायी महिलाओं, उद्यमियों सहित विभिन्न वर्गों के लोग उनसे रचनात्मक गतिविधियों और आर्ट थेरेपी से जुड़े सत्रों के लिए जुड़ने लगे। उनका मानना है कि आज की तेज़ और व्यस्त जीवनशैली में मानसिक थकान, तनाव और भावनात्मक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में कला व्यक्ति को अपनी भावनाओं को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हो सकती है।
पिछले दो वर्षों में 150 से अधिक विद्यार्थी यूनिक वर्सेटाइल आर्ट स्टूडियो से जुड़ चुके हैं। स्टूडियो में बच्चों से लेकर वयस्कों तक के लिए विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिनमें पेंटिंग, टेक्सचर आर्ट, म्यूरल आर्ट, रेज़िन आर्ट, कस्टमाइज्ड आर्टवर्क और मिनिएचर आर्ट प्रमुख हैं। स्टूडियो का उद्देश्य केवल कला सिखाना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमता पहचानने, कौशल विकसित करने और कला के क्षेत्र में नए अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित करना भी है।
विनीता पाटीदार ने भोपाल के हयात पैलेस होटल सहित कई आवासीय और व्यावसायिक कला परियोजनाओं पर भी कार्य किया है। पारंपरिक कला एवं समकालीन रचनात्मक तकनीकों के संयोजन के साथ वे विशेष रूप से MDF मिनिएचर आर्ट के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। इस कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों के लिए नए बाजार और रोजगार के अवसर विकसित करना भी उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

इसके साथ ही, ‘कलाज्ञ’ संस्था के माध्यम से आयोजित कला प्रदर्शनियों के जरिए उभरते और नए कलाकारों को मंच प्रदान करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। विनीता पाटीदार का लक्ष्य है कि कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने, दर्शकों और कला प्रेमियों से जुड़ने तथा व्यावसायिक अवसर प्राप्त करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया जाए।
विनीता पाटीदार के अनुसार, “हमारा उद्देश्य यूनिक वर्सेटाइल आर्ट स्टूडियो को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित कला मंच के रूप में स्थापित करना है, जहां कला सीखने के साथ कलाकारों को अपनी प्रतिभा, अभिव्यक्ति और कौशल को आगे बढ़ाने के अवसर भी मिलें।”
यूनिक वर्सेटाइल आर्ट स्टूडियो आने वाले समय में कला शिक्षा, आर्ट थेरेपी, कमर्शियल आर्ट प्रोजेक्ट्स, प्रदर्शनियों और कलाकारों के लिए नए अवसरों के माध्यम से कला के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।