भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पूर्णिमा, जो वर्तमान में मिस सेंट्रल इंडिया और मिस इंडिया सुपरमॉडल यूनिवर्स 2026 का खिताब अपने नाम कर चुकी हैं, ने कला, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को अपनी सफलता का आधार बताया। पेशे से साइकोलॉजिस्ट पूर्णिमा ने कहा कि बचपन में दूरदर्शन के माहौल, नृत्य प्रस्तुतियों और मंचीय गतिविधियों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। मात्र तीन वर्ष की उम्र से उन्होंने नृत्य की मुद्राओं की नकल करना शुरू किया और बाद में भरतनाट्यम को अपनी साधना बना लिया।
पूर्णिमा ने बताया कि उन्हें भरतनाट्यम का लगभग 20 वर्षों का अनुभव है और इस कला ने उन्हें अनुशासन, निरंतरता, आत्मविश्वास और आत्मपहचान दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि लंबे समय तक वे बॉडी इमेज और आत्मसंदेह जैसी चुनौतियों से जूझती रहीं, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें मजबूत बनाया। वर्ष 2025 में उन्होंने पहली बार मिस सेंट्रल इंडिया के ऑडिशन दिए और इसी मंच ने उन्हें अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर स्वयं को नए रूप में देखने का अवसर दिया।
उन्होंने कहा कि मॉडलिंग उनके लिए केवल सुंदरता नहीं बल्कि व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और अपनी आवाज को समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। साइकोलॉजिस्ट होने के नाते वे मानसिक स्वास्थ्य, आत्मस्वीकृति और आत्मविश्वास पर विशेष जोर देती हैं। पूर्णिमा का मानना है कि हर व्यक्ति में क्षमता होती है, आवश्यकता केवल पहले कदम की होती है। वे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं और विशेष रूप से युवाओं तथा महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।





