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रायबरेली: ब्लॉक प्रमुख बोलीं राहुल जी मदद कीजिए, मिला ये जवाब

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नई दिल्ली। रायबरेली में दिशा की बैठक में मौजूद सलोन की ब्लॉक प्रमुख अंजू कुशवाहा एक महिला के दर्द को लेकर खड़ी हुईं। उन्होंने कहा कि राहुल जी, हमारे ब्लॉक के शैलेंद्र मौर्य की हत्या कर दी गई। उनकी पत्नी मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए भटक रही हैं लेकिन प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है। इस पर राहुल ने दम से कहा कि उनकी मदद कराइए। इतना कहने के बाद अंजू कुशवाहा ने स्वीकार किया कि पहली बार आप सबके सामने बोल रही हूं, इसलिए कांप रही हूं। अगली बार बोलूंगी तो नहीं कांपूगी।

स्वामी मौर्या की बहू ने गेट के लिए मांगी निधि, राहुल बोले-नहीं हो सकता
पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बहू व दीनशाह गौरा की ब्लॉक प्रमुख सविता मौर्या ने कहा कि ब्लॉक में चक्रवर्ती सम्राट अशोक द्वार के लिए सांसद निधि से धन मांगा था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। इस पर राहुल ने कहा कि सांसद निधि से गेट के लिए धनराशि नहीं दी जा सकती। गेट के लिए डीएम मैडम से अनुरोध कर लेंगे।

पिछले साल लोकसभा चुनाव में रायबरेली के संसदीय क्षेत्र से राहुल गांधी मैदान में उतरे तो उनके चुनाव का प्रबंधन दक्षिण के चुनावी मॉडल पर हुआ था। नतीजा यह रहा कि राहुल गांधी ने चुनाव जीता और उसके बाद से ही यह संकेत मिलने लगे थे कि विकास का ताना बाना भी तेलंगाना के रोल मॉडल पर होगा। इसकी झलक मंगलवार को देखने को मिली।

विशाखा इंडस्ट्रीज में ई बाइक को सांसद राहुल गांधी ने लॉन्च किया। चार्जिंग स्टेशन का भी लोकार्पण किया। खास बात यह रही कि उनके साथ इंडस्ट्रीज के जॉइंट डायरेक्टर व तेलंगाना में सांसद वामसी कृष्ण गद्दम भी मौजूद रहे। तेलंगाना की चेन्नूर विधानसभा के विधायक डॉक्टर जी विवेकानंद भी साथ रहे। विशाखा इंडस्ट्रीज की पूरी टीम तेलंगाना से आई थी।

असल में विशाखा इंडस्ट्रीज का हब तेलंगाना में है और यही कारण है कि रायबरेली में विशाखा इंडस्ट्रीज के कदम बढ़ाए जा रहे हैं। आरेडिका के बाद अब विशाखा इंडस्ट्रीज को आगे बढ़ाने के लिए सांसद राहुल गांधी रूपरेखा तैयार हो चुके है। राहुल गांधी ने इस दौरान साफ किया वह विशाखा इंडस्ट्रीज को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी के साथ हैं। इससे देश के हरित ऊर्जा में कदम बढ़ेंगे।

असल में तेलंगाना हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। विशाखा इंडस्ट्रीज ने वहां पर बहुत बड़ा ई बाइक का सेंटर खोल रखा है। इसके साथ ही ई बाइक के कई मॉडल बाजार में आने वाले हैं। यूपी में विशाखा इंडस्ट्रीज रायबरेली को ई बाइक की लॉन्चिंग और चार्जिंग का बड़ा सेंटर बना सकती है। इसी कारण दो मेगावॉट का रूफ टॉप और चार्जिंग सेंटर खोला गया है। सांसद आरेडिका की तरह विशाखा इंडस्ट्रीज के विकास को अपने एजेंडे में लिए हुए हैं।

सांसद राहुल गांधी ने ई बाइक एयूटीएम वॉडर की लॉन्चिंग विशाखा इंडस्ट्रीज में की। बाइक को विशेष तौर से तेलंगाना से लाया गया था। सांसद ने बाइक की खूबियों के बारे में जानकारी ली और रायबरेली में ही बाइक के निर्माण की संभावनाओं पर भी बातचीत की। यूपी में ई बाइक की बिक्री को रफ्तार देने की भी रूपरेखा तैयार होगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।