भोपाल में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई करने वाले और वर्तमान में वाराणसी में सेवाएं दे रहे डॉ. राजीव तिवारी ने खेलों के प्रति अपने बचपन के लगाव को पेशे में बदलकर फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। वे एमपीटी (स्पोर्ट्स मेडिसिन) विशेषज्ञ, एपेक्स कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, वाराणसी में एसोसिएट प्रोफेसर तथा फिजियो फिटनेस स्पोर्ट्स रिहैब सेंटर के संस्थापक हैं। डॉ. तिवारी ने बताया कि खेल प्रतियोगिताओं के दौरान घायल खिलाड़ियों का उपचार होते देख उनके मन में स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट बनने का संकल्प पैदा हुआ, जिसके बाद उन्होंने भोपाल के आयुष्मान कॉलेज से फिजियोथेरेपी की पढ़ाई पूरी की।
डॉ. तिवारी के अनुसार आज की जीवनशैली में गर्दन दर्द, कमर दर्द, जोड़ों की जकड़न और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में फिजियोथेरेपी की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी का उपचार बिना दवाओं के, एक्सरसाइज, मैनुअल थेरेपी और इलेक्ट्रोथेरेपी जैसी तकनीकों से किया जाता है। इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, दर्द कम होता है और प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया तेज होती है। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद, लकवा, फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क और आर्थराइटिस जैसी स्थितियों में समय पर फिजियोथेरेपी शुरू करने से मरीजों को काफी लाभ मिलता है और बीमारी की गंभीरता बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना काल के बाद उन्होंने फिजियो फिटनेस स्पोर्ट्स रिहैब सेंटर की स्थापना की, जहां विशेष रूप से खेल चोटों से प्रभावित खिलाड़ियों का पुनर्वास किया जाता है। केंद्र में कपिंग थेरेपी, ड्राई नीडलिंग, आईएएसटीएम और कायरोप्रैक्टिक जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। डॉ. तिवारी का लक्ष्य अपने संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना और विशेष रूप से ग्रामीण एवं शुरुआती स्तर के खिलाड़ियों तक गुणवत्तापूर्ण फिजियोथेरेपी सुविधाएं पहुंचाना है, ताकि संसाधनों की कमी किसी प्रतिभा के आगे बढ़ने में बाधा न बने।





